जातिवाद ही असली आतंकवाद हैं

पहले यह बताओ ये जातियां किसने और क्यों बनायी? सदियों से इस देश के 85% मूलनिवासियों का हक कौन खा रहा हैं? मंदिरों के अंदर भीख कौन मांग रहा हैं? क्यों ना जातियां ही खत्म कर दो, फिर जब जातियां ही नहीं रहेगी तो फिर ना जातिवाद होगा और ना ही आरक्षण व्यवस्था की जरूरत होगी? सामान्य कोटा-50% किसके लिए हैं? क्या वो आरक्षण नहीं हैं (जबकि सामान्य वर्ग मात्र 15% हैं)? आरक्षित श्रेणियां की सीट को NFS कर बैकलाग में डाल देते हो और फिर वही सीट सामान्य वर्ग में बदल देते हो, तो फिर यह सब क्या हैं भीखमंगों? जातिगत जनगणना क्यों नहीं करवाते? अच्छा कौन किसका हक खा रहा हैं वो पता चल जाएगा, बस यहीं डर सता रहा हैं ना? तुम भी ले लो अपना हक, अपनी आबादी के हिसाब से, कौन रोक रहा हैं? याद रहे जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।

जातिवाद ही असली आतंकवाद हैं।

जातिगत जनगणना हैं जरूरी।

मनुवाद हटाओ देश बचाओ।

बोल 85, जय मूलनिवासी। 

-डॉ.पी.आर.मीणा

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