यह गणतंत्र नहीं अंधतंत्र हैं
यह गणतंत्र नहीं अंधतंत्र हैं, जिसमें हर कोई अंधा बना बना हुआ हैं, देश की वर्तमान परिस्थितियों की चिंता करना तो बहुत दूर की बात हैं, उस पर कोई चर्चा तक नहीं करना चाहता, इसलिए ही इस जातिवादी मानसिकता वाली मनुवादी ताकतों का हौसला लगातार बढ़ता जा रहा हैं, अगर कोई इनकी ख़िलाफत करने की थोड़ी सी हिम्मत भी करें तो उसे नक्सली, आतंकवादी और यहां तक की देशद्रोही तक साबित कर दिया जाता हैं। इस देश में हर कोई भयभीत और डरा हुआ हैं, इसलिए सभी लोगों ने सब कुछ छोड़कर बस अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के चक्कर में अपनी जुबां पर ताला लगा रखा हैं। सोचने वाली बात हैं, अगर हमारे महापुरुष भी इसी तरह से अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के चक्कर में थोड़े से भी स्वार्थी बन जाते तो क्या देश को आजादी नसीब होती? देश की वर्तमान परिस्थितियों से तो साफ जाहिर होता हैं कि आज का गणतंत्र अर्थात जनता का शासन तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता, लेकिन हां, देश को अपने ही चंद कारोबारी मित्रों के पास गिरवी रखने वाले फेंकू का फेंकूतंत्र जरूर हैं। सभी अंडभक्तों को 11वें फेंकूतंत्र दिवस की गोबरी मूत्रबाद।
डरों मत, बदलो सियासत।
सत्यमेव जयते।
-डॉ.पी.आर.मीणा
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