अगड़ा बजट
मेरा नाम डॉ.पुखराज मीणा हैं, अगर इजाजत हो तो मैं भी बजट के बारे में कुछ कहना चाहता हूं, वैसे अगर आप इजाजत नहीं देंगे तो भी मैं अपनी बात तो रखूंगा ही, क्योंकि मैं इस देश का मालिक अर्थात असली वासी, आदिवासी की संतान हूं, इसलिए ऐसा करने से मुझे कोई भी रोक नहीं सकता। तो आता हूं असली मुद्दे पर:
आखिर क्या कारण हैं कि आजादी से लेकर आज तक किसी भी दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम को बजट पेश करने का मौका नही मिला? वित्त मंत्री तो छोड़िए विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री तक भी नही बनाया गया। आखिर क्यों इन मंत्रालयों पर हमेशा अगड़ी जातियों का ही दबदबा रहा? जहां तक मुझे पता चला हैं कि 90 अधिकारियों ने मिलकर बजट तैयार किया हैं जिसमें एक भी दलित और आदिवासी नहीं हैं। अगर आप भी इन देश विरोधी पार्टियों, समाज विरोधी तत्वों और मनुवादी ताकतों का समर्थन करते हुए आये हो तो आज ही इनसे हमेशा के लिए नाता तोड़ ले, क्योंकि ऐसे कारकों ने सिर्फ आपसी सामाजिक भाईचारा और सदभाव को ही ख़त्म नहीं किया बल्कि पूरे देश को ग़रीबी, बेरोज़गारी और अशिक्षा की राह पर लाकर बर्बादी के कगार पर खडा़ कर दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया आप सभी का जो आपने मेरी बात को सुनने की जहमत उठायी। सच में अब दलित, आदिवासी, पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी सरकारों का तिरस्कार करना बहुत जरूरी हो गया हैं।
डरों मत, बदलो सियासत।
बोल 85, जय मूलनिवासी।
सत्यमेव जयते।
-डॉ.पी.आर.मीणा
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